Wednesday, August 11, 2010

अरे यार तुमको मैं क्या क्या बताऊँ,
मेरे दिल के जख्मों को कैसे दिखाऊं||
मुझे मेरे अपनों ने जी भर रुलाया,
ज़हर जाम भर भर के हर दम पिलाया,
वो अपने हैं कैसे में बदला चुकाऊ|
मेरे दिल के ................
जिसे अपना समझा उसी ने दगा दी,
जिसे प्यार किया उसी ने सजा दी,
सज़ा की क़यामत को कैसे भुलाऊ|
मेरे दिल के ...............
जो थे प्यारे बचपन के साथी हमारे,
उन्होंने भी हमसे किये अब किनारे,
मग़र दोष उन पर मैं कैसे लगाऊ|
मेरे दिल के ...............
कई प्यार करते थे दौलत की खातिर,
मिले हैं बहुत ऐसे शातिर मुसाफ़िर,
जो सच्चा हो हमदम कहाँ से मैं लाऊं|
मेरे दिल के ..................
मिले थे जो कल वो लगे सबसे प्यारे,
मग़र आज तक भी हुए ना हमारे,
उन्हें दिल की धड़कन मैं कैसे सुनाऊ|
मेरे दिल के .................
हरेक दिल में है आज मौका परस्ती,
सुना मौत है ज़िन्दगी से भी सस्ती,
तो इस ज़िन्दगी से क्या आशा लगाऊ|
मेरे दिल के .................