Sunday, March 8, 2015

"नारी-शक्ति"


जननी बनकर जन्म दिया और
पाल-पोष कर बड़ा किया है।
पुरुष अंश को जननी ने ही
जीवन का आधार दिया है।।

खेल कूद में बहना से जो
सच्चा प्यार दुलार मिला है।
जननी की उस छाया से ही
प्रेम सत्य का सार मिला है।।

विद्यार्चन के कठिन मार्ग पर
शिक्षक-परियों ने पाला है।
नारी के बिन पुरुष पूर्णता
का आभाष छलावा है।।

पत्नी बनकर नारी ने ही
पुरुष शब्द को अर्थ दिया है।
जीवन के उन कठिन पलों में
शक्ति बनकर साथ दिया है।।

माता-बहना-बेटी-पत्नी
मात्र पुरुष की अभिलाषा हैं।
नारी के यह चार रूप
घर घर की मान मर्यादा हैं।।

ममता-दया-धर्म है नारी
निश्छल मन निष्कपट कला है।
शक्ति-रूप में सर्व शक्तिमय
प्रेम रूप मृदु-मन अबला है।।

करो प्रतिज्ञा जीवन-पथ में
नारी का आदर करना है।
शक्ति के गौरव की रक्षा
में प्रति-पल तत्पर रहना है।।

Friday, March 6, 2015

"होली"

आया होली का त्यौहार
लेकर खुशियाँ अपार।
दिल खोलकर मनाओ रंगरेली
खेलो प्रेम भरे रंगों से होली।

रंगों की ऐसी बौछार
नफरत धुल जाए इस बार।
सच्चे प्रेम से भरे मन की झोली
मिलकर खेलो सबके संग ऐसी होली।

सप्त रंगों की पुकार
सभी धर्मों में हो प्यार।
अब तक खूब तकरार हमने झेली
अहंकार की जल दो आज होली।

रंगा - रंग हो बहार
सबके दिल में केवल प्यार।
जैसे राधा और कृष्णा की ठिठोली
प्रेम रंगों से भरी हो सबकी होली।

जाना मिलकर सबके द्वार
भरना उनके मन में प्यार।
जैसे कृष्णा ग्वाल बालों की टोली
मौज मस्ती लाये जीवन में होली।