Thursday, May 30, 2019

विदा गीत

कर्म क्षेत्र से आज आप, सेवानिवृत्त हो जाओगे।
रोज-रोज घर आफिस के, इस चक्कर से छुट जाओगे।।
एक बात होगी लेकिन, जो अतिशय कष्ट बढ़ाएगी।
रेल कुटुम्ब के इस आलय को, याद हमेशा आओगे।।

पुलकित हृदय, प्रफुल्लित चेहरे, सहज विदाई देते हैं।
शतक वर्ष तक स्वस्थ रहो, ईश्वर से विनती करते हैं।।
मगर एक शंका है दिल में कैसे यकीं दिलाओगे।
रेल सफ़र के संबंधों को, कभी भुला नहीं पाओगे।।

जिस निष्ठा प्रेम समर्पण से, इस रेल चमन का ध्यान रखा।
हम सबकी आशा से बढ़कर, घर बगिया को महकाओगे।।
बस एक अनुग्रह अपना भी, दिल से इसको स्वीकार करो।
इन प्रेम से सिंचित रिश्तों पर, आशीष सदा बरसओगे।।

Wednesday, May 1, 2019

तुम बिन...

मिथ्या है जीवन तुम बिन, कुछ बातें आज बताता हूँ।
अंतर्मन की सत्य व्यथा, तुम सुनो आज मैं कहता हूँ।।

जब से तुम जीवन में आईं, प्रथक कल्पना भूल गया,
नियति के सम-विषम समय में, संग चलना स्वीकार किया।
तुम और मैं से हम बनने तक, हर बाधा को पार किया,
गुज़रे पल-पल क्षण-क्षण का, स्मरण तुम्हें करवाता हूँ।
अंतर्मन की सत्य व्यथा........

तुमने कभी कुछ नहीं मांगा, मैंने खुद कुछ नहीं दिया,
खाली हाथों नीरस जीवन, में हमने विस्तार किया।
हालातों के कठिन थपेड़ों, को तुमने संग सहन किया,
उस अभाव के भावों से, दो-चार तुम्हें करवाता हूँ।
अंतर्मन की सत्य व्यथा.....

हम सबकी छोटी खुशियों पर, तुमने जो बलिदान किया,
अपने हिस्से की रोटी तक, को भी तुमने बाँट दिया।
बच्चों की मुस्कान रहे, इसलिए न कुछ अरमान जिया,
नहीं छुपा है मुझसे कुछ, यह आज तुम्हें बतलाता हूँ।
अंतर्मन की सत्य व्यथा.......

विषम काल में मुझसे छुपकर, तुमने जो विषपान किया,
मेरे टूटे अरमानों का दंश, हमेशा सहन किया।
ग़म के आंसू पिये सदा, खुशियों को घर मे लुटा दिया,
उफ तक नहीं किया तुमने, पीड़ा को सहज समझता हूँ।
अंतर्मन की सत्य व्यथा.....

मन बे-शक तकरार करे, पर दिल ने तुमसे प्यार किया,
हृदय कभी पल भर विरक्ति का, भाव नहीं स्वीकार किया।
जब तुम होती दुखी, क्लेश मन में अपार था सहन किया,
सोच नहीं सकता मैं तुमसे, जुदा कभी रह सकता हूँ।
अंतर्मन की सत्य व्यथा.....

तुम बिन भी जीवन होगा, इसपर विचार तो नहीं किया,
क्षणिक दूरियों ने ही मन को, अंदर तक झकझोर दिया।
नहीं सोचता कब किसने, किस पर कितना उपकार किया,
जैसे दुनियां में आये, वैसा प्रस्थान चाहता हूँ।
अंतर्मन की सत्य व्यथा.....

Wednesday, March 20, 2019

प्रण कर लो...


हम देशभक्ति के रंगों से, होली खेलेंगे प्रण कर लो।
आज़ाद, भगतसिंह, राजगुरु, बाबू सुभाष के रंग भर लो।।

सेना को गाली देते जो, कानून व्यवस्था पर छोड़ो,
तुम नीच, अधम, गद्दारों का, सामाजिक बहिष्कार कर दो।
फिर भी कोई दुष्ट न माने तो, बारूद से पिचकारी भर लो,
हम देशभक्ति के रंगों से, होली खेलेंगे प्रण कर लो।

सरहद पर सैनिक वीर खड़े, प्राणों पर दांव खेलते हैं,
उसका सबूत जो मांग रहे, उन्हें आतंकी घोषित कर दो।
सर कलम करो मक्कारों का, उस रक्त से धरती को रंग लो।
हम देशभक्ति के रंगों से, होली खेलेंगे प्रण कर लो।

देश के अंदर घुसे हुए, पाकी कुत्तों का अंत करो,
देशद्रोहियो देश छोड़ दो, श्वर में 'जन-प्रवाद' कर दो।
आतंकवादियों के चमचो, तुम कितना भी जी-जी कर लो।
हम देशभक्ति के रंगों से, होली खेलेंगे प्रण कर लो।

नापाक देशद्रोही कायर, सत्ता के श्वान जहां भी हों,
अब समय आ गया है, वोटों की गोली से छलनी कर दो।
सरकार बनाने देशभक्त, बेदाग सिपाही को चुन लो।
हम देशभक्ति के रंगों से, होली खेलेंगे प्रण कर लो।

Sunday, March 12, 2017

आओ हे हरिकेश

रंग - बिरंगे रंग से, रंगा है पूरा देश,
जन मन में ना प्रेम है, सिर्फ भरा है क्लेश।
मैं - मेरी के अहम् से, सजा है मानव वेश,
हे हरि कैसा दे रहे, तुम जग को सन्देश।।
प्रेम - प्यार की कल्पना, सिर्फ रह गयी शेष,
जाति - धर्म की अग्नि में, मानव किया प्रवेश।
देश - द्रोह पर बोलते, देश - प्रेम से द्वेष,
भूल चुके अपना वतन, भाता दुश्मन देश।।
घर में बैरी गर्जते, दिल पर लगती ठेस,
दुश्मन के संग जो खड़े, खुद को कहें नरेश।
सेना के शत्रु बने, देशज व्यक्ति विशेष,
कर - दाता का धन हुआ, बेहद व्यर्थ निवेश।।
विप्र अवज्ञा बढ़ रही, भारत में अधिशेष,
दुर्जन मन ज़ाहिर हुआ, ब्रह्म विरोधी द्वेष।
विप्र - द्रोह विध्वंस हो, चिंतन करो विशेष,
ज्ञान परसु धारण करो, हे शृष्टिश्रेष्ठ सर्वेश।।
अग्नि देव को दीजिये, हे महादेव आदेश,
'दहन बुराई का करो, होली का धार वेश'।
रावण रूपी दंश का, अंत करो अवधेश,
कंस कुसाशन बढ़ गया, आओ हे हरिकेश।।

Monday, October 24, 2016

कर दो यह ऐलान

बचपन से जो देशभक्ति के गीत सुनाये जाते हैं,
वतन की रक्षा करने वाले धन्य कहाये जाते हैं।
आज मगर कुछ गद्दारों ने उन पर प्रश्न उठाये हैं,
देश धर्म की रक्षा में जिन अपने प्राण गंवाए हैं।
है उनको धिक्कार गीत जो देशद्रोह का गाते हैं,

भारत के जिस विद्यालय में विषधर पाले जाते हैं।
लोकतंत्र के हत्यारे बदनीयत दिल के काले हैं,
अपनी माँ का चीर हरण जो खुद ही करने वाले हैं।
वर्षों से जो वतन लूटते राजनीति के प्यादे हैं,

कर्कश स्वर से मन को विचलित करते जो नक्कारे हैं।
चीर फाड़ दो भारत से जो नमक हरामी करते हैं,
दुश्मन के आँगन में जिनके नाम से दीपक जलते हैं।
उनको कर दो दफन शब्द जो देशद्रोह का बोले हैं,

पापी पाक समर्थन में जो केवल ज़हर उगलते हैं।
सैक्यूलर के नाम से जो हिंदुत्व कुचलने वाले हैं,
आस्तीन में सरकारों ने जितने अजगर पाले हैं।
शंखनाद हो हिन्दुवाद का अगर देश के लाले हैं,

उन्हें दबा दो देश धर्म जो दूषित करने वाले हैं।
राजनीति के दंगल में इतिहास बदलने वाले हैं,
कर दो यह ऐलान देश को निर्मल करने वाले हैं।

Tuesday, October 18, 2016

जीवन उद्धार

वह जब से जीवन में आयीं,
तन मन मेरा चमन हो गया।
जीवन का यह कंटक वन अब,
गुल गुलशन गुलज़ार हो गया।।
चोटिल बोझिल से इस मन का,
उनसे मिल उपचार हो गया।
मन मरुथल का खाली घट अब,
मधुसागर संसार हो गया।।
मधुर मिलन की उस बेला से,
अब तक तय जो सफर हो गया।
सुंदर सुखद सुनहरे कल का,
हर सपना साकार हो गया।।
खट्टे मीठे अनुभव का कल,
नोंक झोंक से पार हो गया।
दुर्लभ दुर्गम दुःखद समय ही,
जीवन का आधार बन गया।
जनम जनम जीवन के पथ पर,
यदि उनसे हर मिलन हो गया।
मैं समझूँगा सफल हर जनम,
जीवन का उद्धार हो गया।।

Friday, March 25, 2016

समझ लेना कि होली है...!

भरा आनंद से हो मन,
समझ लेना कि होली है।
ह्रदय में हर्ष का नर्तन,
समझ लेना कि होली है।
इमारत एक पुरानी सी,
रुके बरसों के पानी सी।
लगे बीवी वही नूतन,
समझ लेना कि होली है।।
हर्ष से माँ पिता जी का,
ह्रदय गद गद कभी देखो।
ख़ुशी का तुम बनो कारण,
समझ लेना कि होली है।।
समझते हो अगर संतान के,
दायित्व का मतलब।
सफलतम कर सके पालन,
समझ लेना कि होली है।।
किसी इंसान को मुश्किल में,
उलझा देखते हो जब।
मदद करने को मचले मन,
समझ लेना कि होली है।।
हमारी जिन्दगी है यूँ तो एक,
दुःख का घना जंगल।
कभी आये ख़ुशी के क्षण,
समझ लेना कि होली है।।
अगर महसूस हो तुमको,
ख़ुशी गैरों की खुशियों में।
फिजां से दूर हो क्रंदन,
समझ लेना कि होली है।।
स्वयं का घर भरा, खाया,
उड़ाया मौज करते हैं।
किसी भूखे को दे भोजन,
समझ लेना कि होली है।।
घरों में रौशनी करके,
दिवाली सब मनाते हैं।
कभी रोशन हो अंतर्मन,
समझ लेना कि होली है।।

कोहरे के मौसम

कोहरे का मौसम आया है, हर तरफ अंधेरा छाया है। मेरे प्यारे साथी-2, हॉर्न बजा, यदि दिखे नहीं तो, धीरे जा।। कभी घना धुंध छा जाता है, कुछ भी तुझे...