Tuesday, April 19, 2011

एक खामोश चाहत

मैंने हर मोड़ पर तेरे होने को चाहा,
पर हर बार तेरे न होने को पाया|
कितनी मासूम है ये चाहत.......
जो दिन के आखिरी पहर के ढलने तक,
तेरा इंतज़ार करने को तैयार है||

बेकरारी करार में गुज़रे,

ज़िन्दगी सिर्फ प्यार में गुज़रे||
मेरे हिस्से में सिर्फ खार आ जाएँ,
उनका हर दिन बहार में गुज़रे||
क्या बताऊँ मैं दिल की हालत को,
सैकड़ों ग़म खुमार में गुज़रे||
उनको खोकर जो दिन भी गुज़रे है,
धुंध और गुबार में गुज़रे||
ज़िन्दगी का हर एक पल...सिर्फ,
उनके इंतजार में गुज़रे||

Saturday, April 16, 2011

ऐ दुनियां के हिन्दू जागो

ऐ दुनियां के हिन्दू जागो,
अब वक्त नहीं है सोने का |
हम बहुत सह चुके ज़ुल्मो-सितम,
अब समय नहीं चुप रहने का||
इस देश का हिन्दू ह़ी हर-पल,
था जीता रहा औरों के लिए|
इतिहास गवाही देता है,
वह क्षमाशील था सबके लिए||
मुस्लिम और सिख, ईसाई को,
रखा हमने भाई की तरह|
वो आस्तीन के सांप हमें,
डसते ह़ी रहे नागों की तरह||
कभी देश की आज़ादी के लिए,
था प्राणों का बलिदान किया|
अब देश धर्म खतरे में है,
क्यों अब तक हमने सहन किया?
खुद धर्म आवाहन करता है,
बढ़कर आगे संकल्प करो|
यह हिद राष्ट्र हिन्दू का है,
बाकी को चकनाचूर करो||