Sunday, May 18, 2014

ज़िन्दगी की कसौटी

गम-ऐ-ज़िंदगी में अँधेरे हैं बे-शक,
मगर दूर तक तुमको जाना तो है ही।
भले राह-ऐ-मंज़िल में मुश्किल अनेकों, 
मगर हौसला करके चलना तो है ही।
जलाओ दिए सच के अन्तः करण में,
सुगम हो डगर ऐसी आशा तो है ही।
बनो साहसी नाम ईश्वर का लेकर,
हर हाल मंज़िल को पाना तो है ही।।
न दे साथ दुनिया कभी ग़म ना करना,
कदम-दर-कदम साथ रब का तो है ही।
सदा सोच में रखना जग की भलाई,
जहाँ में बुराई का आलम तो है ही।।
कभी धन से तौलो ना इंसानियत को,
नश्वर है जो उसको मिटना तो है ही।
कहाँ जग में आये थे दौलत को लेकर,
कफ़न में लिपट सबको जाना तो है ही।।
अँश ईश्वर का है चेतना सबके तन में,
उसी में विलय इसका होना तो है ही।
स्वयम कष्ट सहकर भी खुशियाँ लुटाओ,
सफल ज़िन्दगी में कसौटी तो है ही।।

Sunday, May 11, 2014

"माँ"

श्वासें तो ईश्वर ने दीं, पर तन तो माँ का दिया हुआ है।
प्रक्रति क़ी इस अज़ब कृति की, माँ ही तो आधार शिला है।।
 
ईश्वर ने दी भले चेतना, सिंचन माँ ने स्वयं किया है।
कोमल तन को बज्र बनाकर, माँ ने ही तो बडा किया है।।

 
बे-शक ज्ञान मिला गुरुओं से, पर माँ ने आधार दिया है।
कोरे तन-मन कच्चे घट को, माँ ने ही आकार दिया है।।
 
 दुनियां ने दी जटिल चुनौती, माँ ने हर वो वार सहा है।
सर्दी-गर्मी धुप-ताप में, आश्रय भी माँ ने ही दिया है।।

 
मुश्किल पल जब थे जीवन में, माँ ने सर पर हाथ रखा है।
छुपा कवच में आँचल के, तब माँ ने प्रेम अपार दिया है।।
 
बे-शक आज शिखर पर शोभित, नींव तो माँ का रखा हुआ है।
शोहरत का यह भव्य महल, उस माँ का ही आशीष फला है।।

 
मत करना वो काम कभी, जो माँ के दिल को दुःख देता है।
माँ को देकर कष्ट जहाँ में, सुखी बता दो कौन रहा है।।
 
मैं भी कहता आज वही, जो दिल पल पल महसूस किया है।
इस दुनियां में ईश्वर से भी, माँ का ही स्थान बड़ा है।।