Monday, November 15, 2010

भूत और नेता

भूतों का दल पहुँच गया नेताजी के द्वार|
नेता जी सो रहे थे बे-सुध पाँव पसार||
एक ने कहा ले चलो इसे "भूत-संसार"|
देखें इसका असर क्या होता हमपर यार||
तुरत दुसरे ने कहा ये तो है ग़द्दार|
इसको अपने लोक में ले जाना बेकार||
यह सुनकर कहने लगा भूतों का सरदार|
अगर जगा तो करेगा तुम पर अत्याचार||
यहीं बूथ लुट्वायेगा कर देगा बेकार|
आस्तीन का सांप है ना करना ऐतबार||
इंसानी गलती करो नहीं तुम्हें अधिकार|
नेता पर विस्वास कर नहीं मिले कुछ सार||
इसको ले जाना नहीं छोडो यहीं विचार|
और कहीं पर ढूंढते अपना नया शिकार||

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