Sunday, February 28, 2016

देश गूंजता...

देश गूंजता गद्दारों की ज़हरीली आवाजो से,
करते हैं आघात ह्रदय पर तीखे स्वर में नारों से।
देशद्रोहियों की आज़ादी मांग रहे सरकारों से,
क्यों ऐसा विद्रोह हो रहा भारत के रखवालो से।।

जो भारत के भाग्यविधाता बने हुए थे सालों से,
पोल खुल रही दिन दिन उनकी सत्ता के गलियारों से।
शाख टूटती बात न बनती राजनीति के प्यादों से,
देश बचा लो शेर खाल में छुपे हुए इन सियारों से।।

देश धर्म कर रहे कलंकित देशद्रोह के कर्मो से,
साथ खड़े हो गद्दारों के पोषित हुए अधर्मों से।
देश उबलता गुस्से में इन जयचंदों की चालों से,
खुद को रखना दूर सदा तुम ऐसे दुष्ट दरिंदों से।।

मेरा एक सवाल आज इन झूंठे वतन-परस्तों से,
भारत खंडित करने वालों के साथ खड़े इन गुंडों से।
ज़ाहिर करो तुम्हारा रिश्ता उन नापाक पिशाचों से,
भारत माँ के शेर नहीं तुम करते काम शिखंडी से।।

संसद की सुन बहस ह्रदय बेजार हुआ जज्वातों से,
ऐसा लगता देशभक्ति भी हार गयी मक्कारों से।
तूती कैसे ताल मिलाये बड़े बड़े नक्कारों से,
देश बचाना होगा अब इन पापी राजकुमारों से।।

5 comments:

Ansuya Desai said...

वाह बहुत खूब कहा ..

Uday Bhatt said...

बहोत ही बढीया कविता Ashok Sharma जी।
आपके विचार नयी देशाए देती है।
~ Uday Bhatt (uday-bhatt.blogspot.com)

chetna said...

बहुत ह्रदय स्पर्शी लेखनी है आपकी अशोक भाई

chetna said...

बहुत ह्रदय स्पर्शी लेखनी है आपकी अशोक भाई

Siddharth Arora said...

The Day which Dedicated to the Legendary, Immortal Artist
https://kuchhkisseankahe.blogspot.in/2017/01/why-so-serious.html