Friday, February 12, 2010

बच्चे हैं नादान

बच्चे हैं नादान, मगर हम भारत की पहचान बनेंगे|
पढ़-लिखकर विद्वान बनें हम, रोशन इसका नाम करेंगे||


मात-पिता और गुरुजनों के, लाड-प्यार का पात्र बनेंगे|

चमके उनका नाम जगत में, ऐसे हम संकल्प करेंगे||


भगत सिंह, आज़ाद, राजगुरु, जैसे हम इंसान बनेंगे|

दुश्मन डर से थर-थर काँपे, ऐसे हम सब काम करेंगे||


वीर शिवाजी से शिक्षा ले, देश-धर्म की ढाल बनेंगे|

भारत-माता की रक्षा में, तन-मन-धन बलिदान करेंगे||


हो करके विज्ञान-विशारद, ऐसे हम विद्वान् बनेंगे|

दुनियां जिस पर नत-मस्तक हो, ऐसे आविष्कार करेंगे||


हिन्दू-मुस्लिम-सिख-इसाई, के हम अनुचर नहीं बनेंगे|

आपस में मिल-जुलकर हम सब, नए युग का निर्माण करेंगे||


जन-सेवा अनवरत करें हम, फल के इक्षुक नहीं बनेंगे|

मेहनत, लगन और निष्ठा से, अपना बस कर्त्तव्य करें
गे|

भारत के नौनिहालों को समर्पित"

8 comments:

मनोज कुमार said...
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मनोज कुमार said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।
इसे 13.02.10 की चिट्ठा चर्चा (सुबह ०६ बजे) में शामिल किया गया है।
http://chitthacharcha.blogspot.com/

sangeeta swarup said...

आज के बच्चे ही देश के कर्णधार हैं....सुन्दर अभिव्यक्ति

Shayar Ashok said...

बहुत खूब , अशोक जी ....
आज के बच्चे, इन बातों को ध्यान में
रखेंगे , तो जरुर एक नए युग की
आरंभ होगी ||
बधाई !!!!!!!

Ashok Sharma said...

Aap sabhi ka bahut bahut shukriya.

prakash said...

Aapki rachna ka jawab nahin,
Ashok ji bahut bahut badhayi....

Anonymous said...

good work............

keep it up

nasim

Lalita said...

Hamare bachche hamare paas es desh ki dharohar hain, aapne bahut kam shabdon me bahut sundar tareeke se bahut badi baten kah dali hain, agar bachche es par amal karenge to nischit hi naye yug ka nirman hoga.
bahut bahut badhai