Friday, January 4, 2013

बापू तेरे देश की हालत

गली-गली में आन्दोलन और,
जन - जन में आक्रोश है।
बापू तेरे देश की हालत,

फिर  से  डांवा - डोल  है।।

भ्रष्टाचार चरम सीमा पर,
पाप  बढ़ा  घनघोर  है।
धर्म  की कोई बात न करता,

अधरम का ही जोर है।।
 

रक्षक ही भक्षक बन बैठे,
रखवाला ही  चोर  है।
पैसों से कानून बिक रहा,

बात  बड़ी  दिल-तोड़  है।।
 

मानव की तो हुयी तरक्की,
मानवता  कमजोर  है।
ताकत से चल रही विरासत,

प्यार  को  नहीं  ठौर  है।।
 

ज्यों-ज्यों कदम बढे कलयुग के,
जीवन  हुआ  कठोर  है।
माँ बहनों की घर के बाहर,

लाज़ लुटे हर ओर  है।

किस से कहूँ ह्रदय की पीड़ा,
कोई  न  देता  गौर  है।
सुबक-सुबक कर दिल है रोता,

विह्वल  भाव - विभोर  है।।

2 comments:

PRACHI said...
This comment has been removed by the author.
PRACHI said...

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