Wednesday, November 11, 2015

दीपों का यह पर्व 'दिवाली'

अन्धकार मिट जाए धरा से
सत्य सदा रोशन ही रहे।
हर तन पर हों वस्त्र
सभी के सर पर छत की छाँव रहे।।
भूख सताये नहीं किसी को
धरणि धान्य-धन पूर्ण रहे।
मिले सभी को काम
किसी का नहीं कोई मोंहताज़ रहे।।

कम मिलने पर दुःख न हो
ज्यादा का नहीं अभिमान रहे।
हर प्रलय आपदा विपदा में
मानव मानव के साथ रहे।।
द्वेष राग और भेद न हो
बस भाई-चारा बना रहे।
आशा का दीपक सदा जले
दिल में उमंग की लहर रहे।।

हो जीवन उत्कृष्ट सभी का
हर्ष दिलों में बसा रहे।
दीपों का यह पर्व 'दिवाली'
सबके लिए शुभ सौम्य रहे।।

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