Monday, November 16, 2015

बचपन

सुबह सवेरे जल्दी उठकर
मात-पिता का वंदन करना।
नित्य क्रिया से निवृत होकर
स्वास्थ्य हेतु कुछ कसरत करना।
बहुत याद आते हैं वो दिन
निश्छल मन ईश्वर को जपना।
साफ़ स्वच्छ तन-वस्त्र पहनकर
माँ के प्रेमाशीष का मिलना।
विद्यालय की राह में मिलते
सभी बड़ों का आदर करना।
गुरु की सीख पिता का कहना
माँ का आँचल ही था गहना।
गलती करके डरे सहमते
माँ को सब कुछ सत्य बताना।
मात्र-प्रेम पाकर अबोध मन
सुबक सुबक कोने में रोना।
झूंठ बोलना पाप समझकर
सदा सत्य की बातें करना।
खूब लगाकर मन पढ़ने में
निडर - प्रखर - साहस से रहना।
याद बहुत आता है बचपन
कैसा था वह स्वप्न सलौना।
माँ की ममता और प्रेम से
संवर गया था जीवन अपना।

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