Sunday, November 29, 2015

छोड़ नहीं सकते..!

छोड़ नहीं सकते क्या अब हम,
जाति धर्म की बातें करना।
बर्बरता को संस्कृति कहकर
,
निर्दोषों का रक्त बहाना।।
जाति धर्म वर्णों की खातिर,
मानवता को घायल करना।
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
,
बनकर जग में विष फैलाना।।
देश राष्ट्र राज्यों के होकर,
धरा-धर्म को दूषित करना।
भारत पाक चीन अमरीका
,
इंग्लिश रूसी क्यों कहलाना।।
नदी नीर, वसुधा उसका धन,
कभी न कहती किसको देना।
छोड़ नहीं सकते क्या हम भी
,
प्रकृति को अंकुश दिखलाना।।
देह द्वेष और काम क्लेश का,
द्वन्द्व दिलों में क्यों फैलाना।
नारी रहे पुरुष की दासी
,
क्यों विचार यह दिल में लाना।
धरती यदि हम सबकी माता,
क्यों न बंधु भाव से रहना।
रोक नहीं सकते क्या अब हम
,
दुनियाँ में नफरत फैलाना।।
-अशोक शर्मा

3 comments:

Unknown said...

Dil ki baat kahi hai apne par afsos ki abb ye wakt nahi raha

Alok Mishra Alok Mishra said...

Dil ki baat kahi hai apne par afsos ki abb ye wakt nahi raha

Ashok Sharma said...

Thank you so much